मोर सोना चांदी हीरा रे, अब नहीं सहावय पीरा रे…छत्तीसगढ़ी गीत-

ग्राम-ताराडांड, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल नेटी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
मोर सोना चांदी हीरा रे, अब नहीं सहावय पीरा रे-
मन मा मोर एक ठन सपना है, मोला तोर संग जीना मरना है-
दिल के मंदिर मा तै रे संगी, मूरत बन के समाय रे-
जठना मा सुते ले मोरे मयारू, रोज नींद मा आए रे-
मै तोर सुरुज तै चंदा रे, झन प्यार होवे ठण्डा रे…

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